१४


भीगी सड़कें —
मरी टहनियां भी 
होतीं जीवित 



१३


 लो, हुए तीन  
  निहारते बारिश—
कुत्ता, बिल्ली और  मैं  




१२


तूफ़ानी रात – 
  बिल्ली कब आई 
मेरी गोद में ?  




११


इस साल भी 
  दीवार पर वहीं 
वर्षा लकीर 




१०


कड़कती धूप —
हिलती छाया  
सूखी डाल की 




अब वो क्या करे ?
मकड़ी के जाल में –
        उगता सूर्य 




आज निकला 
सफ़ेद नावों पर –
अष्टमी का चाँद 




पत्ता पानी में...
  अब और क्या   
बस, बहते जाना  




बारिश की हवाएं   
घर में आयीं  –  
बालों से पकड़ीं 




स्याह रात …  
    तारे गिरे नदी में  
छन्न छन्न    





घूमते विचार 
     स्थिर!
पंखुड़ियां चंपा की 





गर्मी की छुट्टियाँ . . .   
  स्कूल में खेलतीं
तितलियाँ 




 क्यों गाए सदा   
  नीली चिड़िया  
टूटी टहनी पे ?




नदी तट पे      
दो टुकड़ों में  
     बगुला और मैं