हिंदी हाइकु
२६
अकेली रात —
बुलबुल के घोंसले से
छोटी चहक
२५
आहें . . .
दीवार की दरारें
हुईं गहरी
२४
चाँदनी रात—
गंजे सर
पुराने दोस्तों के
२३
बहता टीले से
वर्षा का पानी...
एक नई भाषा
२२
उड़ता बीज
खिड़की के बाहर
—
एक छोटा विराम
२१
डूबता सूरज —
क्या वो लेगी सुझाव
अपनी परछाईं का
२०
अमावस
फिर भी . . .
फूल सप्तपरनी के
१९
सूखी पत्तियाँ . . .
माँ ने कुछ छोड़ीं
बेटी के लिए
१८
छत की मरम्मत —
आधा चाँद
मेरे बिस्तर पर
१७
चाँद असाड़ का
मकड़ी ने जाल में
ज़रा सा पकड़ा
१६
मीठी भोर—
पत्ता गिरा
नदी में
१५
दीपावली —
पटाखों के बीच
आवाज़ झिं
गुरों की
१४
भीगी सड़कें —
मरी टहनियां भी
होतीं जीवित
१३
लो, हुए तीन
निहारते बारिश—
कुत्ता, बिल्ली और मैं
१२
तूफ़ानी रात –
बिल्ली कब आई
मेरी गोद में ?
११
इस साल भी
दीवार पर वहीं
वर्षा लकीर
१०
कड़कती धूप —
हिलती छाया
सूखी डाल की
९
अब वो क्या करे ?
मकड़ी के जाल में –
उगता सूर्य
८
आज निकला
सफ़ेद नावों पर –
अष्टमी का चाँद
७
पत्ता पानी में...
अब और क्या
बस,
बहते जाना
६
बारिश की हवाएं
घर में आयीं –
बालों से पकड़ीं
५
स्याह रात …
तारे गिरे नदी में
छन्न छन्न
४
घूमते विचार
स्थिर!
पंखुड़ियां चंपा की
३
गर्मी की छुट्टियाँ . . .
स्कूल में खेलतीं
तितलियाँ
२
क्यों गाए सदा
नीली चिड़िया
टूटी टहनी पे ?
१
नदी तट पे
दो टुकड़ों में
बगुला और मैं
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